इश्क़ ज़ंजीर तेरी तोड़ ही डाली हमने

20170222074845

ज़िंदा रहने की ये तरकीब निकाली हमने
बात जो ख़ुद से बिगाड़ी थी बना ली हमने

देख ले हम तेरे ज़िन्दान से आज़ाद हुए
इश्क़ ज़ंजीर तेरी तोड़ ही डाली हमने

दिल किसी वक़्त भी सेलाब में आ सकता था
कर दिया एक भरे शहर को ख़ाली हमने

और फ़िर यूँ भी हुआ राख बनी शोलों की
और फ़िर यूँ भी हुआ राख खंगाली हमने

ज़िंदगी अब तो ख़ता माफ़ के हम चलते हैं
जितनी निभनी थी मेरी जान निभा ली हमने

Leave a Reply