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इश्क़ ज़ंजीर तेरी तोड़ ही डाली हमने

ज़िंदा रहने की ये तरकीब निकाली हमने
बात जो ख़ुद से बिगाड़ी थी बना ली हमने

देख ले हम तेरे ज़िन्दान से आज़ाद हुए
इश्क़ ज़ंजीर तेरी तोड़ ही डाली हमने

दिल किसी वक़्त भी सेलाब में आ सकता था
कर दिया एक भरे शहर को ख़ाली हमने

और फ़िर यूँ भी हुआ राख बनी शोलों की
और फ़िर यूँ भी हुआ राख खंगाली हमने

ज़िंदगी अब तो ख़ता माफ़ के हम चलते हैं
जितनी निभनी थी मेरी जान निभा ली हमने

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