नाम बदलने की प्रक्रिया: कैसे आप कानूनन अपना नाम बदल सकते हैं

नाम बदलने की प्रक्रिया

विवाह के बाद महिलाओं का सरनेम या फिर कहें कि उपनाम बदल जाता है। कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपने मौजूदा नाम से खुश नहीं होते। तो कुछ लोग वास्तु शास्त्र या फिर ज्योतिष या अंक विज्ञान के आधार पर भी अपना नाम बदलवाना चाहते हैं। ऐसे लोगों को नाम बदलवाने के लिए एक कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी होता है। हालाँकि इसके लिए आपको किसी वकील की जरूरत नहीं होती। परन्तु अगर आप कोई पासपोर्ट वगैरह बनवाना चाहते हैं और आप उसके लिए दिए जा रहे प्रार्थना पत्र में अपना बदला हुआ नाम डालना चाहते हैं तो आपको इसके लिए अपने नाम बदलने के प्रमाण पत्र की जरूरत पड़ेगी।

आईये जानते हैं नाम बदलने की प्रक्रिया

आप नाम क्यों बदलवाना चाहते हैं:

देखा जाए तो यह एक निजी सवाल है। लेकिन नाम बदलवाते समय इसका जिक्र करना अनिवार्य है। जैसे अगर आपका हाल ही में विवाह हुआ है और आप अपने पति का नाम भी अपने नाम के साथ जुड़वाना चाहती हैं। या किसी की सलाह पर आप ऐसा कर रहे हैं। तो भी इसका जिक्र करना जरुरी होता है।

बनवाना होगा शपथ पत्र:

स्थानीय नोटरी के पास जाकर नाम बदलवाने के लिए जरुरी शपथ पत्र की मांग करें। राज्य के हिसाब से लगने वाले स्टाम्प शुल्क के बारे में नोटरी आपको सूचित करेगा। इसके बाद तय राशि के स्टाम्प पर नाम बदलाव का शपथ पत्र बनेगा। इसमें नये नाम के साथ साथ पुराना नाम, महिलाओं के लिए पति का नाम, पता, विवाह की तारीख आदि का ब्यौरा देना होता है। शपथ पत्र नये और पुराने दोनों नामों के बारे में बताता है। पूरा नाम बदलने के अलावा नाम में कोई अक्षर जोड़ने या कम करने में भी यही सपथ पत्र लगता है। इसको सम्भाल के रखें क्योंकि यह शपथ पत्र आपको कई जगह काम आएगा।

अख़बार में प्रकाशन:

शपथ पत्र बनने के बाद उसमें दो गवाहों के हस्ताक्षर अनिवार्य हैं। इसके अलावा दो राजपत्रित अधिकारियों के हस्ताक्षर अनिवार्य हैं। जिनके साथ ही आधिकारिक स्टाम्प लगा होना भी जरूरी होता है। शपथ पत्र बनने के बाद स्थानीय अख़बार में इसका विज्ञापन देना होता है। इसके लिए अधिक प्रतिषठित और अधिक प्रसार वाले अख़बार का चयन करें। अख़बार में प्रकाशन जिस दिन होता है उस दिन की कुछ प्रतियां खरीद कर रख लें। ये भी बाद में काम आएँगी।

कर्मचारियों की नाम बदलने की प्रकिया होती है अलग:

राज्य और केंद्र के अधीन आने वाले कर्मचारियों की नाम बदलने की प्रकिया में थोड़ा अंतर होता है। आम लोगों के लिए तो शपथ पत्र बनवाने और अख़बार में विज्ञापन के बाद काम पूरा हो जाता है लेकिन राज्य सरकार के अधीन कर्मचारियों को खुद के खर्च पर नोटिस और विज्ञापन का प्रकाशन करवाना होता है। वहीँ केंद्रीय कर्मचारियों को नाम बदलाव से सम्बंधित शपथ पत्र बनवाने की जरूरत नहीं होती। इसके लिए उन्हें एक डीड भरनी होती है। डीड भरने के बाद उस में दो राजपत्रित अधिकारियों के दस्तखत करवाने होते हैं। इसके बाद अख़बार में एक विज्ञापन देना होता है। विदेश में रहने वाले भारतीयों को भी शपथ पत्र की जगह एक डीड देनी होती है जिसमें भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों या दूतावास की तरफ से दस्तख्त होने चाहिए।

शुल्क में भी होता है अंतर:

राजपत्र में प्रकाशन के लिए केंद्रीय और राज्य के कर्मचारियों के शुल्क में भी अंतर होता है। जैसे बालिग़ व्यक्ति के नाम परिवर्तन के प्रकाशन का शुल्क एक हजार रुपये है। वहीँ नाबालिग व्यक्ति के नाम प्रकाशन का शुल्क 1500 रूपये है। वहीँ विदेश में रहने वाले बालिग़ व्यक्ति के लिए 3100 और नाबालिग के लिए 4500 रुपये शुक्ल है।

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