Happy Teachers Day | जवानी बनाम बुढापा

Happy Teachers Day-जवानी-बनाम-बुढापा

ये जंग थी जवानी और बुढ़ापे की, ये जंग थी अहंकार की, ताकत की, गुमान की…..शिष्टाचार और अशिष्टाचार की।

एक गुरू ने अपने शिष्य को तलवारबाज़ी की सारी विद्या सीखा दी। गुरू बूढ़ा हो गया था, शिष्य जवान। किसी ज़माने में गुरू का लोहा पूरा गांव-शहर मानता था, आज भी उसके नाम के चर्चे वीरो की श्रेणी में सुर्खियों से लिए ही जाने जाते है पर आज शिष्य ही उन्हें चैलेंज करने लगा था। दरअसल शिष्य ने जमाने के मुताबिक तरक्की की भी थी, उसके नाम के ढंके भी सुर्खिया बटोर रही थी कुछ दिनों तक तो सब ठीक चला किन्तु शिष्य शीघ्र चाटुकारो से घिर गया, उसके इर्द-गिर्द झूठे लोगो का ठिकाना बन गया, अब यही समय था कि शिष्य को गुमान और अंहकार घेरने लगा, अब वो जगह-जगह घूम कर लोगों से कहता था कि उनका गुरू तो कुछ भी नहीं। आज इस गांव, शहर, राज्य में क्या, आस-पास के कई कई राज्यो में उस से बड़ा कोई तलवारबाज़ नहीं।
लोगों से इतना कहने तक में कोई बड़ी बात नहीं थी। पर उस दिन बड़ी बात हो गई, जब शिष्य ने खुलेआम चैलेंज कर दिया कि अब वो तलवार चलाने में इतना माहिर हो चुका है कि उसे कोई हरा ही नहीं सकता। स्वयं उसके गुरू भी नहीं। उसका अहंकार इतना सिर चढ़ गया कि उसने गुरू को मैदान में उतरने के लिए चुनौती दे दी कि या तो मैदान में आकर मुकाबला करो या फिर गुरूअई छोड़ो।
सबने बहुत समझाया कि गुरू से ऐसा व्यवहार ठीक नहीं। पर किसका अहंकार समझा है, जो उस शिष्य का समझता।
गुरू तो एक-आध बार बेटा समझ के अनदेखी कर दिए…..सोचा बालक चाटुकारो की वजह से भटक गया है कुछ दिनों में सुधार जाएगा कि, किन्तु शिष्य गुरु की अनदेखी को अपनी ताकत की आजमाइस समझते हुए ….यदा-कदा ललकारने लगा, स्थिति बेहद नाजुक होती जा रही थी, समाज और लोगो की परवाह किये बैगर शिष्य गुरु को बेइज्जती करते हुए लगातार चुनौती दे रहा था, गुरु अब वृध्दा हो चुके थे चाहते तो शिष्य के चैलेंज की अनदेखी कर सकते थे। पुत्र रूपी जिस शिष्य को उन्होंने सबकुछ सिखाया, आज वही चैलेंज कर रहा है।
न चाहते हुए भी आख़िर गुरू को अपने शिष्य के साथ तलवारबाज़ी के उस चैलेंज को स्वीकार करना ही पड़ा।
पूरा गांव-शहर जानता था की गुरू बूढ़े हो गए हैं और शिष्य की ताकत के आगे वो मिनट भर भी नहीं टिकेंगे। पर गुरू ने चुनौती को स्वीकार कर लिया तो कर लिया।
शिष्य का माथा ठनका कि ये बुड्ढा गुरू चैलेंज स्वीकार कर चुका है, जबकि शिष्य का निजी भ्रम था कि चाहे जो भी हो गुरु अब इस उम्र में चुनौती स्वीकार नहीं करेंगे….खैर अब तो लड़ाई आर-पार की होनी तय थी, शिष्य ने इस चुनौती का मतलब ऐसे निकाला की गुरु ने कोई न कोई विद्या जरूर छिपा कर रखी होगी।
मुकाबले में हफ्ते भर का समय था। शिष्य ने गुरू पर नज़र रखनी शुरू कर दी कि आख़िर किस विद्या के बूते उसने चैलेंज को स्वीकार किया है। उधर गुरु को एहसाह हो चूका था कि शिष्य का नेत भटक चूका है और वो हत्या करना चाहता है इसी उद्देश्य से जासूसी भी कर रहा है।
शिष्य ने एक दिन देखा कि गुरू एक लोहार के पास गया और उससे कहा कि तुम मेरे लिए पंद्रह फीट लंबी एक म्यान बना दो।
शिष्य ने गुरू को ऐसा कहते सुना और समझ गया कि गुरू ने उसे यही विद्या नहीं सिखाई थी। पंद्रह फीट लंबी म्यान, मतलब पंद्रह फीट लंबी तलवार, मतलब वो पंद्रह फीट दूर से ही उसकी गर्दन उड़ा देगा।
शिष्य भागा-भागा दूसरे लोहार के पास पहुंचा और लोहार से कहा कि भाई, तुम मेरे लिए सोलह फीट लंबी तलवार और म्यान बना दो। शिष्य ने समझ लिया था कि जब गुरू पंद्रह फीट दूर से तलवार निकालेगा, उससे एक फीट लंबी तलवार से वो उन पर हमला कर देगा और उनकी सर को धर से अलग कर दूंगा……।
तलवारबाज़ी के इस खेल के लिए मीडिया को भी बुलाया गया। सभी न्यूज़ चैनल वहां अपनी कैमरा टीम के साथ पहुंचे। आख़िर मुकाबला गुरू और शिष्य के बीच था।
तलवारबाज़ी शुरू हुई। सबने देखा कि गुरू के हाथ में पंद्रह फीट लंबी म्यान थी और शिष्य के हाथ में उससे भी एक फीट लंबी म्यान।
सीटी बजी और खेल शुरू।

ये क्या?
गुरू ने पंद्रह फीट लंबी म्यान से अपनी छोटी सी तलवार सटाक से बाहर निकाली। शिष्य अभी अपनी सोलह फीट की म्यान से सोलह फीट की तलवार चौथाई भी नहीं निकाल पाया था कि उसकी गर्दन पर गुरू की तलवार तन गई।
शिष्य समझ गया कि गुरू ने सिर्फ म्यान ही बड़ी बनवाई थी, तलवार नहीं। शिष्य ने म्यान और तलवार दोनों बड़ी बनवाई थी।

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अब शिष्य की गर्दन पर गुरु की तलवार चमक रही थी, शिष्य घुटनो पर बैठा अपनी जीवन की भीख मांग रहा था….उसके गुमान, अहंकार और ताकत, गुरु की एक चाल से ही धूल चाट रही थी।
इस कहानी में मैं चाहूं तो लिख सकता हूं कि गुरू ने अपनी तलवार से शिष्य का गला एक ही झटके में उड़ा दिया। पर हम हिंसा की बात नहीं करते। केवल सबक सीखाने की बात करते हैं। तो यहां गुरू ने शिष्य को पूरे गांव-समाज की मौजूदगी में सबक सिखा दिया था।
याद रहे, तलवार की शक्ति से दुनिया में कोई युद्ध नहीं जीता जाता।
:- अमित अभिषेक।

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