पैसे की कमी की वजह से इस औरत ने अपने पति का शव छोड़ा ट्रेन में।

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भारत में पिछले अनेक सालों से कई सरकारें आई और कई गई परन्तु गरीबी रूपी श्राप और बीमारी से हमारे भारत को कोई भी मुक्त नहीं करवा पाया।समय के साथ-साथ गरीब और गरीब होता जा रहा है और अमीर और अमीर होता जा रहा है।आज भी विश्व में जब कभी भारत देश का ज़िक्र होता है तो इसके साथ गरीबी शब्द जोड़ दिया जाता है और शायद यही एक कारण है कि अन्य देशों से विपरीत हमारा भारत अभी भी एक डेवेलोपिंग कंट्री है जोकि हर भारतवासी के लिए बहुत ही दुखद है।भारत में आज भी अनेक लोग बुख्मारी के साथ मर रहे हैं,गरीबी के कारण उन्हें दो वक्त की रोज़ी-रोटी तक नसीब नहीं होती।सवतंत्रता के इतने वर्षों के बाद भी आज भारत में सेंकडों लोग बेरोज़गार हैं जो कि रोज़गार के लिए हर रोज़ इधर-उधर भटकते हैं और आखिर में कुछ काम न मिलने के कारण उन्हें मात्र अपने आंसुओं का गुंट पीकर सोना पडता है।

आज का हमारा यह लेख भी गरीबी पर आधारित है।आज इस लेख में हम आपका परिचय एक ऐसी महिला के साथ करवाने जा रहे हैं जिसने पैसों की कमी के कारण अपने पति का शव एक ट्रेन में ही रख दिया और खुद बच्चों को लेकर आगे बढ़ गई।

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यह कहानी ओड़िशा की रहने वाली सरोजनी की है जिसने अपने पति के शव चलती ट्रेन में ही रख दिया।दरअसल सरोजनी अपने पति और तीन बच्चों के साथ आन्ध्र प्रदेश से वापिस ओड़िशा ट्रेन में आ रही थी परन्तु रस्ते में अचानक ही उनके पति बीमार हो गए और उसी ट्रेन में ही उनकी म्रत्यु हो गयी।उस समय सरोजनी के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह अपने पति के शव को साथ अपने गाँव वापिस ले जाती।इसलिए वह अकेले ही अपने बच्चों के साथ अपने पति के शव को ट्रेन में ही छोड़कर आगे बढ़ गयीं।

सरोजनी से जब एक पत्रकार ने कुछ प्रश्न पूछे तो सरोजनी ने ऐसा कहा-

मैं एक अंजान जगह पर बिल्कुल अकेली और अनपढ़ थी,साथ ही में मेरे साथ तीन छोटे-छोटे बच्चे।मेरे पास न ही कोई पैसे थे।आखिर में क्या करती,कहाँ जाती,किस्से मदद मांगती?

हालाँकि कुछ देर बाद एक आदमी की सहायता से सरोजनी ने अपने जेठ को फ़ोन करके स्तिथि के बारे में बताया जिसके बाद उनके जेठ ने आकर अपने छोटे भाई के शव को वापिस घर लिया।


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