आखिर क्यों ? आखिर कौन ? और आखिर कब तक?

हर दिन की तरह आज का दिन भी काफी खुशनुमा था। ठंडक भरी सुबह में शायद आज ज्यादा ताजगी थी। आज शनिवार था अतः हमेशा की तरह नित्यकार्यो ने निवृत…

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हर दूसरे पागधारी पान चबाने वाले बकलोल को चाहिए एगो “राज्य” !

हर दूसरे पागधारी पान चबाने वाले बकलोल को चाहिए एगो "राज्य" ! बाँकी तुम्हारा #चीनी-मिल, #पेपर मिल, #DMCH, #WIT, #DCE, #LNMU, #मैथिली, ##किसान, और बाँकी सारे #मुद्दा जाए कमला, कोशी के किछेरी मे ! दिन भर facebook पे मिथिला-मिथिला चिल्लाने…

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