देश पर टिप्पणी: व्यतिगत लाभ या कुछ और?

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ये मानना पूरी तरह सत्य है की हम विकास कर रहे है। हमारा देश भारत, मजबूत राष्ट बनकर विश्व के सामने उभरा है। बाकि सरे विकसित देशो का भी हमारे देश के प्रति दृष्टिकोण बदल रहा है। कभी जो हर बात में इंडिया पर दबाव बनाने वाले देश आज भारत के साथ हरेक सही कदम पर खड़े है। कारगिल का युद्ध हो या आजादी के बाद पाकिस्तान के विरुद कश्मीर युद्ध सभी में हम अपनी अन्तर्राष्ट्रीय सीमा में रह कर ही लड़े। जिसका  मुख्या कारण अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का डर और दबाव ही था। और आज  यही हम पाक वाले कश्मीर में ३ कि.मी. घुस कर सर्गिकल स्ट्राइक करते है और विश्व समुदाय के लोग इसकी भर्तसना करने की बजाय इसकी तारीफ करते है.मै आपको  बहुत ज्यादा पीछे नही बल्कि 5 साल पीछे ले जाना चाहता हूँ जब 26/11 का  आतंकी हमला हुआ था, उसमे लगभग ७ अमेरिकन नागरिक मारे गए थे पर उस समय अमेरिका ने  आतंकवाद के खिलाफ भारत का पुरोजोर समर्थन देना मुनासिब न समझा। वही अमेरिका आज आतंकवाद के खिलाफ साथ खड़ा है। अब आप खुद ही अनुमान लगा सकते है की हमारा देश कहा पहुँच गया है।

हम विश्व में मजबूत राष्ट्र की तरह उभर रहे है , लेकिन देश के अन्दर की कुछ छिछोरी हरकत हमारे छवि को विश्व समुदाय में धूमिल कर सकती है। कभी सलमान का ये कहना की पाकिस्तनी कलाकार को देश छोड़ने के लिए बाध्य करना गलत है, तो कभी जस्टिस काटजू का देश के दुसरे नए  बापू बनकर पाकिस्तान को कश्मीर के साथ बिहार लेने का ऑफर करना। केजरीवाल का अपने देश के आर्मी पर विश्वास न करते हुए उनके द्वारा किये गए सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत मांगना। ये तो सरे उद्धरण मात्र है ऐसे बहुत सारे केस हमको देखनो को मिल जायेंगे।

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हमारा देश एक लोकतान्त्रिक देश है यह अपने भावनाओं को व्यक्त करने की सबको आजादी हैं पर अपनी भावनावों को उजागर करते समय दुसरो की भावनावों को ठेस पहुचने की कोशिश न करे। लोकतंत्र की सफलता की कशौटी ही आरोप-प्रत्यारोप है पर कुछ सिमित मुद्दों पर और देश की आन्तरिक मामलों पर। जब देश की बात आये तो पार्टी,राज्य ,कलाकार सभी को दाँव पर लगाया जा सकता है।

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जो अपने वतन पे सक करे वो हिन्दुस्तान का सच्चा लाल नही है| और ये वही है…..

जस्टिस काटजू को मै ये कहना चाहूँगा की पुराने बापू का देश पर इतना अहसान था फिर भी अपनी न चला सके और आप तो बिन अहसान वाले नए बापू बनाने चले है। मुझे  ऐसा लगता है की  केजरीवाल  के पासपोर्ट  पर राष्ट्रीयता कॉलम में भारतीय की जगह आपियन लिखा होगा या  आप पार्टी।

पाकिस्तान में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही होगी तभी तो अपने पार्टी की छवि को बनाये रखने के लिए देश की छवि बिगड़ने पर तुले हुए है।

मै बस ये कहना चाहुंग की सभी नागरिक के लिए देश सर्वोपरी है.देश के लिए सबकुछ छोड़ा जा सकता है पर किसी भी चीज के लिए देश नहीं छोड़ा जा सकता। हमारा इतिहास गवाह है हमारी देशप्रेम का। हम भगत सिंह,चंद्रशेखर आजाद, खुदीराम बोस के वंसज है जिनके खातिर देश के लिए जिन्दगी तुच्छ थी। अगर हम वक्तिगत लाभ के लिए देश की आन बान के साथ खिलवाड़ करे तो हम उन वीरो के त्याग को गली दे रहे है और उनके वंसज के नाम पर कालिख के धब्बे है।

और अंत में उन सबके लिए बस ये कहना चाहूँगा

 

 

“सुना था इतिहास में एक मुर्ख उसी डाली पर बैठ कर उसी को कटते मिला था।

आज फिर देखने को मिल गया है वो इतिहास का पन्ना

मगर बस फर्क इतना था

वो नासमझ था और ये ज्यादा ही समझदार है।”

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