3 सौ SUV गाड़िया, हजारो से अधिक समर्थको की मौजूदगी में भागलपुर जेल ने जनाब शाहबुद्दीन साहब को रिहा कर इतिहास रचा, वैसे जनाब की आजादी का रिवेलुशन महागठबन्धन जमाने से चला रही थी किन्तु श्रेह तो श्री लालू जी ही ले गए…..ये दुर्भाग्य ही है कि राज्य के मुखिया को बाहुबली साहब ने परिस्थितियो का CM बता दिया।
वैसे उनका ये बताना और कहना उचित भी है, आखिर 11 सालो तक जनाब नितीश जी के वजह से ही नर्क भोग रहे थे, वरना किस की मजाल की छेड़े दिलेर को…..
वैसे बताते चले की सन 2014 में सिवान में राजीव रौशन की हत्या के साथ ही साहब की बेहूनाही तय हो गई थी, ये तो नसीब का खेल था कि जनाब को दो साल मुफ्त में कष्टप्रद जीवन गुजरना पड़ा।
खैर देर आये दुरुस्त आये है ….जनाब को मेरे तहे दिल से नई पारी की शुभकामना है, वैसे एहि शुभकामना राज्य के मुखिया नितीश जी के लिए भी है, आखिर अब उन्हें इन्ही परिस्थितियो में बिहार की ताज सम्भालनी है, ऊपर से 2019 भी सिर पे खड़ा है और इसी 2019 के लिए PM इन वेटिंग नीतीश जी ने इतनी बड़ी कुर्बानी बकरीद से ठीक पहले दी है।
हालांकि इन दो सालों में नीतीश जी के लिए बिहार में गठबंधन की सरकार चलना किसी कश्मीर समस्या सुलझाने से कम नहीं होगा।
एक तरफ जहां गठबंधन की बड़ी पार्टी दिन -प्रतिदिन अकेला ही सरकार चलाने के लिए हिलोरे मार रही है, तो दूसरी ओर अपनी मन-मर्जी बिहार सरकार पे थोपती जा रही है।
विवशता के ये आलम भी मुख्यमंत्री जी की जिद्द ही तो है, बिहार लुटे अथवा बर्बाद हो उन्हें तो सिर्फ देश के सामने शराब बंदी वाली डंका के साथ नरेंद्र मोदी जी का विकल्प बनना है।
नितीश जी अपनी पूरी लोकप्रियता को डुबाते हुए ख्याली प्लाव के चक्कर में बिहार की जनता के साथ लगातार भारी मजाक किये जा रहे है।
खैर जो भी हो ये तो बिहार की बदकिस्मती ही है जो बदहाली और बर्बादी के लिए जिम्मेदार है इसके लिए किसी नेता और पार्टी को क्या कोसना।
:- अमित अभिषेक।

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