मेरी कहानी-मेरी जुबानी; बिहटा(बिहार) से बेल्जियम: संतोष कुमार

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मैं, संतोष कुमार, ग्राम-डुमरी, पोस्ट-बिहटा, पटना का रहने वाला हूँ। मैं एक शिक्षक हूँ, जो समाज में सुशिक्षा, सद्भाव एवं उन्नति के लिए तत्परता से काम करता हूँ। आज, यूँ ही बैठे हुए विचार आया है अभी तक जो कुछ भी किया है उसका विश्लेषण करूँ। बचपन से आजतक जो भी घटनाए हुई है मेरे साथ, मैंने आश्वश्त हूँ कि यदि कोई इसे जाने तो महसूस होगा कि समाज में कैसे एक गरीब का लड़का शिक्षा के माध्यम से एक प्रतिष्ठित एवं प्र्रगतिशील जीवन जी सकता है।

When I was child I used to get involved into all activities other than study. Till 9th class I did not even see the school. When I started going school which was so far from my village(school had no roofs and concrete wall) I felt it was too late to start study. Even each year we had to discontinue study for 3 months because of flood. , मगर पता था कि पढ़ना है मगर मैट्रिक करने के बाद क्या पढ़ना है पता नहीं। अंग्रेजी का ज्ञान राम भरोसे था, करे तो क्या करें बहुत से दोस्तो केे सलाह से इंजीनियरिंग की तैयारी करना चाहा क्योंकि सबने कहा कि मेरा गणित बहुत अच्छा हैैं। स्कल के समय में मैं मॉनिटर था और शिक्षक हमें ही कहते थे विषय पढ़ाने को, सर बैठे रहते थे मेैं ही अपने दोस्तों को उस उम्र में पढ़ाता था गणित, भूगोल और विज्ञान। जो गणित मुश्किल होता था उसे तीन-चार तरीके से बना कर बोर्ड पर दिखाता था। इस कारण सभी ने गणित लेकर इंजीनियर बनने की सलाह दी। मगर इंजीनियर बनने के लिए कौन सी परीक्षा होती है पता नहीं था। इंटरमिडिएट की परीक्षा जैसे-तैसे अंगेजी माध्यम से पास किया। अभी तक इंजीनियर कैसे बनते है नहीं पता था।

एक दिन अचानक से कुछ लोग तथागत की बात कर रहे थे उनके मुँह से ही आईआईटी का नाम सुना जो मेरे दिमाग में घर कर गया। शायद ये नाम पहले भी सुना होगा मगर उतना एहसास नहीं जैसा स्टेशन पर के लोग आईआईटी के बारे में बता रहे थे। एक वाक्य में कहा जाए तो उनका कहना था धरती पर सात जगह ही स्वर्ग है जहाँ कोई दुःख नहीं है एक बार कोई चला जाए तो स्वर्ग की अनुभुति होगी। मानो मेरे अंदर वही आग फिर से पनप गई। सोचा चाहे जितना भी समय लगे मैं आईआईटी ही जाऊँगा। (इच्छा थी कि आएस/साइंटिस्ट बनू) कुछ साल में कर्म एवं भाग्य ने साथ दिया अब अंग्रेजी समझ में आने लगी एवं एक अनसुने विद्वान व्यक्ति से मुलाकात हो गई। उन्होंने अपने घर पर मुझे रहने का आदेश दे दिया तब क्या था भौतिकी और गणित की जानकरी अच्छी हो गई जिसकी वह से मैने आईआईटी स्क्रीनिंग द्वितीय समय में पास किया (पहली बार जब आईआईटी के बारे में जाना था तो 4 महीने बाद ही परीक्षा में शामिल हुआ और पास नहीं कर पाया) उस साल IIT Main पास नहीं कर पाया। मगर सुपर-30 के बारे में  सुना था आनंद सर एवं अभ्यानंद सर गरीब बच्चों को चुनकर आईआईटी की तैयारी कराते हैं एवं लगभग सभी मेद्यावी छात्र आईआईटी को चले जाते है। मैंने भी पता किया, जो लोग कोचिंग में नाम लिखाते है उनका सम्भावना अधिक हो जाता है सुपर-30 में चुनाव के लिए। इस कारण मैं भी नामांकण लेना चाहा मगर उतने पैसे नहीं थे। नामांकण परीक्षा में द्वितीय स्थान आने के बाद आर-एस-एम में नामांकण नहीं हो पाया (पंकज कपाडिया ने परीक्षा में टॉप किया, बाद में हम दोनों बहुत अच्छे दोस्त बनें) मगर हिम्मत कर आनंद सर के छोटे भाई प्रणव सर से मिला एवं अपनी स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने बाहर बैठने को बोला काफी इंतजार करने एवं स्टाफ से उनके बात सुनने के बाद प्रणव सर से फिर जाकर मुलाकात हुई जो कि आर-एस-एम के सारे activity संभालते थे मेरे समझाने पर उन्होंने मुझे अनुमति दी की हर महीने इंसटॉलमेंट पर नामांकन फी दे दूँ।

मैंने 500-800 हर महीने देते हुए उस probability को रखा जिससे सुपर-30 में चुनाव हो जाएँ पैसे की व्यवस्था करने के लिए कभी-कभी भईया को सब्जी बेचने एवं पापा को खेती में भी सहायता कर देता था।

Inspile getting 2nd position I dinn’t get reserved seat at RSM, I attend whole course as standby, even I write teacher’s lectures in standing mode. Finally I was selected for Super-30 acquiring 6th position (Pankaj got 7th position) in Super-30 entrance test.

मैं आनंद सर और प्रणव सर का शुक्रगुजार हूँ कि उन्होंने मेरा बहुत ध्यान रखा, मेरे struggle का अच्छे से समझा एवं मेरे सपनो को पूरा करने में पूर्ण सहयोग दिया मगर अभी भी आईआईटी का real test बाकि था। शिक्षा वास्तव में क्या होती है उसे जानना बाकि था और ये मैंने अभ्यानंद सर से सीखा की असल में शिक्षा का क्या महत्व है। उनकी Multidimesional thinking and lateral approach मानो फिर से मेरे दिमाग में घर कर गया। उन्होंने सोसाईटी को समझाते हुए Physics and Math बखुबी समझाया उनका एक Motivational speech हमेशा दिमाग में रहता है कि अभी समाज से लेने का समय है और जब सफल हो जाओगे तब समाज को लौटाने का भी एक महत्वपूर्ण दायित्व है अभ्यानंद सर ने मानों पूरी दुनिया ही बदल दी जिस वजह से पिछली बार आईआईटी परीक्षा में फेल हुआ था उन्होंने इस तरह विश्वास भर दिया कि मानों अब कोई आईआईटी जाने से नहीं रोक सकता था। वे Physics के सवालो को इतने सरलता से समझाते थे कि उसे Feel होता था उन्होंने बिना Numerical solve किए हम लोगोंको उसका Answer फील करा देते थे उसी का परिणाम था कि मेरी Physics and Maths के साथ-साथ Chemistry Subject भी सुधर गई और मैंने मेहनत दोगुनी-चौगुनी बढ़ा दी। दुर्भाग्यवश उसी साल आईआईटी ने exam pattern change कर दिया schooling अच्छी तरह से नहीं होने की वजह से I didn’t acquire rank under 100 which I was expecting but reached to IIT. Schooling के बाद ये नाम जिन्होंने मुझे आईआईटी पहुँचाया उनका आर्शिवाद मेरे लिए वरदान बना। संजय सर जिन्होंने Physics and Math पढ़ाया आनंद सर एवं प्रणव सर जिनके वजह से ‎मैं सुपर-30 में select हुआ एवं अभ्यानंद सर जिन्होंने confidence एवं सही direction दिया जिसकी ‎वजह से आईआईटी जाना Finally संभव हुआ।

संजय सर जिन्होंने Physics and Math पढ़ाया आनंद सर एवं प्रणव सर जिनके वजह से ‎मैं सुपर-30 में select हुआ एवं अभ्यानंद सर जिन्होंने confidence एवं सही direction दिया जिसकी ‎वजह से आईआईटी जाना Finally संभव हुआ।

Poor English and Schooling सही से नहीं होने की वजह से रैंक तो अच्छा नहीं आया परन्तु आईआईटी में अपने department के लिए diamond बना, सभी Professors ने बहुत सराहा। आईआईटी खड़गपुर में यह एक History बना कि कोई undergraduate student got opportunity to move foreign university to complete master’s degree. That was a lifetime achievement for me and during that programme, I worked with a world-leading professor of quantum chaos. There I have able to influence these professors up to that extent they offer me to pursue Ph.D. under their guidance. It was education till Super-30 which was fruitful to me in pursuance of a programme at the foreign university.

During stay at Belgium one day a seminar was conducted on the issue related to Indian Education system organised by European Union. इस सेमिनार में भारत के उन गरीब बच्चों का फोटो दिखाया गया जो पढ़ना तो छोड़िए उनके कहने के भी लाले थे। Anchor requested the Indian Audience to answer about the situtation. One of Maharatra Student started critising politician for worst situation of India. I counter him (क्योंकि अपने देश के चतवइसमउ को दूसरे देश के लोगों के साथ share करना मुझे अच्छा नहीं लग रहा था) Which led me to overwhelmed with bad situtation of India. मैन आगे की पढ़ाई रोक दी, अपना phD का सपना छोड़ दिया। समाज के उत्थान के लिए मैंने प्लानिंग की, मैंने UPSC की preparation start की, सोच IAS बनकर सेवा करूंगा एवं ऐसी पालिसी बनाऊंगा जिससे हर एक को जीवन में प्रगतिशील एवं सुअवसर प्रदान करें मगर घर की आर्थिक स्थिति को देखते हुए IAS बनने का सपना भी छोड़ दिया तब जाकर कलम उठाई और बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया। माँ-पापा, माधव, अरविंद सर, संजय सर, आनंद सर-प्रणव सर, अभ्यानंद सर ये नाम हैं जिनके वजह से इस लायक बन पाया हूँ कि दूसरों के सपने खास कर जो आर्थिक रूप से पिछड़े है उनके सपने को साकार कर रहा हूँ उन्हें Doctor and Engineer बनाकर।मैं जब भी इन लोगों को अभ्यांनद सर की बात समझाता हूँ हमेशा जुबान एवं दिमाग में छाया रहता है। अभ्यानंद सर जो पुरे society के well wishing के बारे में सोंचते है मुझे बहुत प्रभावित करते हैं।

Jab bhi abhayanand sir ke saath hamara samajik muddo par chaarcha hoti hai chahe swasthya ho ya siksha ho to hum harbar is niskarsh par pahunchte hai ki samaj saksham hai apne samasyaon ko nipatne me.

Super30 was an experiment which could be concluded as society itself has enough potential to solve its societal challenges. “Students coming from disadvantage section work together at super30 and go to IIT in a group which is common for Super 30 it all became possible because of Abhayanad sir ideology and his dedication for the upliftment of society.

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