अब क्यों वापस बुला रहे हो तुम??

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रात में मुस्कुरा रहे हो तुम
चाँद को क्यूँ चिढ़ा रहे हो तुम??

फूटकर रो पड़ा जो बादल भी
कौनसा गीत गा रहे हो तुम??

मुझको अपना बता के दुनिया में
कितने दुश्मन बढ़ा रहे हो तुम??

इसमें लपटें हैं, और न धुआँ है
आग कैसी लगा रहे हो तुम??

मैसेज सीन करके रिप्लाई तक न देना
ये कैसे इश्क़ जता रहे हो तुम??

किसी और के हाथ में तुम्हारा हाथ
क्यों ऐसे मुझको जला रहे हो तुम??

दुनिया छोड़ने का फैसला कर चुका हूँ
अब क्यों वापस बुला रहे हो तुम??

आतिफ रहमान

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