भारत के अटूट और अटल स्तम्भ:- अटल बिहारी बाजपेयी

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भारत के अटूट और अटल स्तम्भ:- अटल बिहारी बाजपेयी

“भारत को लेकर मेरी एक ही दृष्टि है:- ऐसा अखंड भारत जो भूख, भय, निरक्षरता और अभाव से मुक्त हो”

मान्यनिये भारत रत्न अटल बिहारी बाजपेयी जी आज हमारे आदरनिये पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी का 93वां जन्मदिवस है, थोड़ा दुखी तो हूँ के आज बिमारी ने उनकी वाणी और मनोस्मृति पर कब्ज़ा कर रखा है और वो काफी लंबे अरसे से हम भारतीयों से रूबरू नहीं हो पाए है, अतः ईश्वर से यही विनती है कि वो जल्द से जल्द स्वस्थ हो और हमे अपना स्नेहशील मार्गदर्शन प्रदान करे।
वो भारत के प्रथम और सबसे लंबे समय तक रहने वाले गैर-कांग्रेसी प्रधानमन्त्री रहे जिन्होंने न सिर्फ गठबंधन सरकार को स्थायित्व दिया अपितु सफलतापूर्वक संचालित भी किया।
इनकी सरकार 24 सहायक दलों के गठबंधन से बनी जिसमे 81 मंत्री थे, इतने सहायक दल और इतने मंत्री होने के बाद कोई आनाकानी नहीं और कभी कोई विवाद नहीं, अपितु समर्थक दलों को छोड़िये इनके बिपक्षि दल भी कभी अटल जी के खिलाफ नहीं गए, वो सदैव आलोचनाओं की फ़िक्र किये वगैर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे और जब चाहते अपने विपक्षियों का भी इस्तेमाल कर लेते थे, विपक्षियों को भी उनके दरवाजे पर दस्तक देने में कभी कोई संकोच नहीं होता था।

प्रख्यात और कुशल राजनितिक होने के साथ साथ अटल जी एक बहुत ही अच्छे और सुलझे हुए कवी भी थी जिनकी रचनाओं से हम मे ऊर्जा का संचार और हमारा मनोबल मजबूत और हमे जीवन में शिखर तक पहुचने की प्रेरणा मिलती है।

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अटल जी अपने छात्र जीवन में भी बेहद अनुशाषित और प्रतिभाशाली थे, इन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दिनदयाल उपाधयाय से अपनी राजनीति का पाठ पढ़ा।
इनके पूरा जीवन उपलब्धियों से भरा पूरा जीवन रहा, पद्मविभूषण, डी० लिट्, लोकमान्य तिलक पुरूस्कार, सर्वश्रेष्ठ सांसद पुरूस्कार, भारत रत्न, पंडित गोविन्द वल्लभ पन्त पुरूस्कार, बांग्लादेशी हुकूमत के द्वारा फ्रेंड्स ऑफ़ बांग्लादेश लिबरेशन वॉर अवार्ड जैसे अनेको पुरूस्कार से नाबाजे गये।

प्रधानमंत्री के रूप में खुद को और पूरे देश को हमेशा ही बैश्विक पटल पर अखंड तथा अटूट साबित करते हुए भारत को स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना से एकसूत्र में पिरोना, 11 मई तथा 13 मई को पोखरण परीक्षण करते हुए भारत को परमाणु संम्पन देश साबित करना, पकिस्तान से संबंधों में सुधार हेतु 19 फेब. 1990 को दिल्ली से लौहार तक बस सेवा की शुरुआत तथा खुद उस का प्रथम यात्री होना, काबेरी जल विवाद सुलझाना, सुचना एबं प्रधोगिकी विकाश हेतु आयोग का गठन, केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग का गठन।

राष्ट्रीय राजमार्ग और हवाईअड्डों का निर्माण, कोकण रेलवे ये सारे उनके ही किये गए जन-कल्याणकारी कार्य थे।
प्रधानमंत्री सड़क योजना के अनुसार पुरे भारत को सड़क मार्ग से जोड़ना ये उनका सबसे बड़ा और सबसे सुयोजित कार्य था, उनके इन्ही कार्यो के बदौलत कहा जाता था कि अगर हिंदुस्तान में शेरशाह शुरी के बाद किसी के शासनकाल में सर्वाधिक सड़क निर्माण हुआ है तो अटल जी के शासनकाल में हुआ है,इन्होंने पुरे कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत को सड़कमार्ग से एकसूत्र में पिरोया था। प्रधानमंत्री के रूप में

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सुरक्षा समिति,आर्थिक सलाह समिति व्यपार एबं उद्योग समिति, उपभोक्ता सामग्रियों की कीमतें नियंत्रित रखने के लिए समय समय पर मुख्यमंत्री सम्मलेन, सातसूत्रीय गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम, अर्बन सेल्लिंग एक्ट समाप्त करना जो के आने वाले भविष्य के लिए एक बहुत बड़ा कदम साबित हुआ इनके अलावा ग्रामीण रोजगार सृजन जिसे हम बाद में मनरेगा और भारतीय मूल के विदेशों में बसें नागरिकों के लिए बिमा योजना, मुस्लिमो को एकता और भाईचारे का सन्देश देते हुए पहली बार सरकारी खर्चे पर रोजा और इफ्तार ये सारे उनके अति बिश्वनिये कदम और योजनाये थी जिन्होंने उन्हें न सिर्फ सहयोगियों दलों के बीच अपितु विपक्षियों के बीच भी काफी लोकप्रियता दी।।

“मेरी कविता जंग का एलान है, पराजय का प्रस्ताव नहीं।
वह हारे हुए सिपाही का नैराश्य-निनाद नहीं, झुझते हुए योद्धा का जय-संकल्प है, वह निराशा का स्वर नहीं, आत्मविश्वास का जयघोष है” ये टिप्पणियां उन्होंने तब की जब पाकिस्तानी हुकूमत ने संघर्ष विराम का उल्लंघन कर के हमारे चौकियों पर कब्ज़ा कर के घुसपैठ करनी आरम्भ की तब परिणाम स्वरुप अटल जी ने कारगिल युद्ध की घोषणा कर के न सिर्फ विजय पाया वल्कि पकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया।

अटल जी जब विदेशमंत्री थे तभी इन्होंने संयुक्तराष्ट्र महासभा सम्मलेन में हिंदी भाषण दे के हम पुरे भरतबंशीयों को गौरवान्वित किया।।

प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने कश्मीर को मुख्यधारा से जोड़ा और वहाँ के बाशिंदों को सरकार में भरोसा दिलवाया,
कंधार,कारगिल, और संशद पर हमले के बावजूद वो कभी नहीं झुके और आगे बढ़ के शिखर-वार्ता की पहल की परन्तु पडोसी मुल्क के हुकूमत की दोगलेपन रवैये के कारण ये वार्ता सफल नहीं हो सकी।।

सर्वप्रथम पुरे देश में स्थिर जीडीपी भी उनके शाशनकाल में हुयी।।

ऐसे और अनेको प्रकरण हुए जब उन्होंने न सिर्फ देश को अपितु खुद को भी साबित किया
चाहे वो बिपक्ष का विरोध हो या परमाणु परीक्षण के बाद पश्चिमी देशों का विरोध, पकिस्तान और बांग्लादेश का घुसपैठ हो या आतंकबादी हमले वो कभी नहीं झुके और न हमे झुकने दिया न हमे टूटने दिया।।

आज जब वो 93 वर्ष के हो चुके है और शारीरिक बीमारियों से झूझ रहे है हमे उनकी कमी तो खलती है परंतु उनके होने के विश्वास ने हमे आज भी एकसूत्र में पिरोया है और शक्तिशाली महसूस करवा रखा है।।

जहा तक मेरा विचार है, मैं बिलकुल कहना चाहूंगा कि आजादी के बाद से हमारे देश के सर्वश्रेष्ठ प्रधानमंत्री अटल जी ही थे जिनके समय भारत में चहुमुखी विकाश हुआ।।

आज भी उनका सानिध्य हमे काफी कुछ सिखा रहा है।।।

“बाधाएं आती है आएं
घिरे प्रलय की घोर घटाएँ
पाँवों के नीचे अंगारे
सिर पर बरसे यदि ज्वालायें
निज हाथों में हँसते हँसते
आग लगाकर जलना होगा
कदम मिलकर चलना होगा”

मान्यनिये अटल बिहारी बाजपेयी जी

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