बिहार में रोजगार :- धांधली और पैसों का खेल।।।

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कल परसो की बात है, बिहार पुलिस के परीक्षा परिणाम आये है।।

परिणामो में धांधली सामने आने के दावे हो रहे है, और व्यापक स्तर पर धांधली का अंदेशा है, फिर से पूरे बिहार प्रदेश के शाषण तंत्र, शिक्षा व्यवस्था और शिक्षा माफियाओं की बाते होने लगी है।

बिहार कभी इन सब बातों से अछूता नही रहा है, ऐसा कोई भी परीक्षा नही होता बिहार में जहां इन शिक्षा माफियाओं और हुक्मरानों की मिलीभगत नही होती है और ये पैसों का खेल नही चलता है।

सिर्फ इस स्तर के परीक्षाओं का छोड़िये मैं तो दावा करता हु के आपको बिहार प्रशाशनिक सेवाओं में भी इन आलाधिकारियों, राजनेताओ तथा शिक्षा माफ़ियाओं के कारगुजारी देखने को मिल जाती है।।

मुझे याद है, जब बिहार प्रशासनिक परीक्षाओं के परिणाम आते है।

अखबारों मे बड़े बड़े अक्षरों में लिखा होता है।।

रिक्शा चलाने वाले का बेटा बना टॉपर,
भूंजा बेचने वाले कि बेटी बनी पूरे राज्य मे अब्बल,
पी.डब्लू.डी में संविदा पर कार्यरत चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी का बेटा श्रेणी में अब्बल,
फल बेचने वाले ने अपने बच्चों के सपनो को दी नई उड़ान ।

कुछ ऐसे ही मुख्य समाचार होते है, अखबारों में अगले 2-3 दिनों के लिए,
मिठाइयों का दौर चलता है, बधाइयां देने का तांता चलने लगता है,
बिहार सरकार की शिक्षा पद्धति की प्रशंसा होने लगती है।।

अब आइये मैं आपको असलियत में ले कर चलता हूँ, जिन समाचारों को पढ़ कर हम बिहारी गर्व से अपना सीना चौड़ा करते है दरअसल उन परिणामो के पीछे हमारी सरकार और शिक्षा माफियाओं के बहुत बड़ा खेल छिपा होता है।

दरअसल पूरे नियुक्तियों में से 80 प्रतिशत सीटें उन परीक्षार्थियों को दी जाती है जो किसी न किसी तरह से सही शिक्षा माफिया तक पहुच पाते है और एक बड़ी रकम अदा करते है,

जिनके पीछे किसी सरकारी कर्मचारी, नेता, जनता प्रतिनिधि, बड़े बड़े अफसरशाह का हाथ होता है वो किसी न किसी प्रकार अपना परिणाम इन 80 प्रतिशत वाली सूचि मे शामिल करवा लेते है।

अब बाते करता हूँ उन बाकी के बचे हुए 20 प्रतिशत नियुक्तियों पर जिन पर ये सरकारी तंत्र और शिक्षा माफिया बड़े ही शातिराना ढंग से अपना खेल खेल जाते है और ऐसी युक्ति निकालते है जिस से उनकी 80 प्रतिशत की बेईमानी को भी ढंक लेते है।

सबसे पहले तो इस शाषण तंत्र और माफियाओं के आपसी मिली भगत से वैसे परीक्षार्थियों को ढूंढा जाता है जो आर्थिक और सामाजिक रूप से सर्बाधिक पिछड़े हुए है, जिनके घर वाले न्यूनतम से भी निम्न आय पर गुजर बसर करते है,

वैसे घरों के परीक्षार्थियों के परिणामो को अंदर से फेर बदल कर सर्वश्रेस्ठ परिणामो के शुरुआती 40-50 स्थानों में जगह दिलवाई जाती है,
उसके बाद उन मेघावी छात्रों का,जिन्होंने सत्य में इस परीक्षा को उतीर्ण कर लिया होता है, वैसे परिणामो को अलग कर के बचे 20 प्रतिशत में भरा जाता है, जिस से इन 20 प्रतिशत मेघावी परीक्षार्थियों की सफलता की गूंज में बाकी 80 प्रतिशत पैसे और पहुच वाले परिणामो की धांधली को छिपा और दबा दिया जाता है, ताकि कल को कोई सच मे योग्य परीक्षार्थी ने किसी प्रकार से कोई समस्या भी खड़ी की तो इनकी गर्दन बची रहे।।

हमने हर बार परिणामो की घोषणा के बाद देखा है कि बहुत से परिक्षार्थी सरकार से गुहार लगाते है कि उनके परिणामो मेगलती हुई है पर हर बार की तरह इस बार भी उन्हें बहला फुसला कर, डंडे चटका कर, उन पर उल्टे केस करवा कर सरकार अपनी बेईमानी और इस गोरखधंधे को छिप्पा लेती है, हर बार दमन के सामर्थ्य पर।।

मूर्ख जनता ऐसे मुख्य समाचारों में ही उलझ के रह जाती है, और जो योग्य परीक्षार्थी इस शाषण और शिक्षा माफिया के खेल में रौंदे जाते है वो इस परिणामो के खिलाफ भी नही जा पाते क्योंकि उन्हें औरों की बात हटाये, उनके अपने भी उनका साथ देने के बजाय उनको ही अयोग्य और असक्षम ठहरा देते है उन 20 प्रतिशत का उदाहरण दे दे कर।।

न जाने कीतनी बार इन बातों के विरोध को ले कर आवाजें बुलंद की गई, कितने परीक्षार्थियों के आत्महत्याएं तक कि खबरे आयी, धरने दिए गए, भूख हड़ताल हुई, लाठियां तक चटकाई गयी, परन्तु इस शाषण-तंत्र और शिक्षा माफिया के आगे किसी की भी नही चली और ये पैसे और बेइम्मानी का धंधा आज भी शुरू है।।

आज जब फिर से बिहार पुलिस के परिणामो में भारी मात्रा में ऐसी धांधलियों का खुलासा हुया तो खुदको रोक न पाया।।

आज जो जागरूकता आ रही है, काश ये शायद थोड़े समय पहले आ गयी होती तो फिर आज दुबारा ये नौबतें नही आती।

शायद समाज एक हद तक बदल चुका होता,
ये सारी मांगे बार बार न उठ रही होती

जिस गंदी राजनीति की नींव सत्ता के शक्ति के साथ मान्यनिये लालू जी ने रखी थी,

आज उसे कुर्मी सम्राट नीतीश कुमार बिल्कुल सही तरीके से आगे बढ़ा रहे है, बिहार पुलिस के परिणामो में कुर्मी समाज के परीक्षार्थियों के भागीदारी को देखते हुए ऐसा ही प्रतीत हो रहा है कि सिर्फ उनके गृह जिले के ही युवा नीतीश बाबू की जिम्मेदारी है, बिहार के अन्य प्रांतों के नही।।।

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#आखिर_कब_तक_शर्मशार_होगा_बिहार।।।

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